हिंदू-मुस्लिम एकता की एक जीती जागती मिसाल है कैथल की ये दरगाह… लगता है विशाल मेला
March 27, 2025 665
0 0

हिंदू मुस्लिम एकता की एक जीती जागती मिसाल है कैथल नगर के जवाहर पार्क में स्थित 'बाबा शाह कमाल लाल दयाल' की दरगाह आज शाम को शुरू होगा तीन दिवसीय उर्स मेला, देश विदेश से पहुंचेगे लाखों श्रद्धालू हिन्दुओं के हुए महान संत बाबा शीतल पूरी के डेरे से आने वाली पहली चादर से शुरू होगा उर्स मेला उर्स मेले के दौरान 29 मार्च शनिवार को देश के जानेमाने गायक हमसर हैयात बाबा शाह कमाल की दरगाह पर बाबा शान में कव्वालियां पेश करेंगे
कैथल (रमन सैनी) अनेकता में एकता के सूत्र को पिरोए भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जिस में अनेक धर्मो, वर्गों तथा समुदायों के लोग अति प्राचीन काल से साथ-साथ रहते आए हैं। समय की करवट के साथ ही अनेक पैगम्बर, सूफी, संत तथा फकीर इस पावन भूमि में अवतरित हुए हैं जिन्होंने कौमी एकता तथा सौहार्द को बनाए रखने के लिए अनेक कलामों,कविताओं, दोहो, छंदो तथा वाणियों के माध्यम से जन मानस को एक सूत्र में बांधने में मिसाल कायम की है। इसी कड़ी में कैथल के बाबा शाह कमाल का नाम भी सभी धर्मो के लोगों में बड़ी श्रद्धा तथा भक्तिभाव से लिया जाता है।
‘बाबा शाह कमाल लाल दयाल’ की दरगाह
कैथल नगर के जवाहर पार्क में स्थित ‘बाबा शाह कमाल लाल दयाल’ की दरगाह हिंदू मुस्लिम एकता की एक जीती जागती मिसाल है। वीरवार के रोज यहां भक्तों का हजूम उमड़ पड़ता है और लोग बड़ी आस्था तथा श्रद्धा के साथ बाबा की दरगाह पर अपना मत्था टेकते हैं तथा अपनी मनोकामना पूरी होने की मनौती मांगते हैं। कैथल के बाबा शाह कमाल की इस दरगाह का देश की बड़ी दरगाहो में एक नाम है. यहाँ पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्र शेखर, अनेको राष्ट्रीय राजनेता, सांसद, हरियाणा सहित अन्य राज्यों के मंत्री, विधायक, अभिनेता और अन्य हस्तिया बाबा शाह कमाल दरगाह पर पूजा अर्चना कर चुके है।
यहां आने वाले असंख्य भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि बाबा की मजार पर सच्चे दिल से मांगने पर बाबा उनकी हर इच्छा पूरी करते हैं। गौरतलब बात यह है कि बाबा की मजारकी देखभाल तथा र खरखाव की सारी जिम्मेवारी हिंदू पुजारी निभाते हैं तथा मनौती मांगने आने वाले लगभग सभी भक्त हिंदू हैं। यह दरगाह अजरत बाबा शाह कमाल कादरी तथा दूसरी उनके पौत्र शाह सिकंदर कादरी की है जिन पर श्रद्धालु अपने श्रद्धा सुमन अपिर्त कर मनौती मांगते हैं। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि 25 वर्षो तक इन दरगाहों की देखभाल एक हिंदू स्वगीय रोशन लाल गुप्ता कैथल द्वारा की जाती थी तथा उस के पश्चात इन दरगाहों की देखभाल स्वर्गीय बाबा कुलवंत शाह ने की और अब उनके पुत्र बाबा रजनीश शाह कर रहे हैं। बाबा रजनीश शाह अब इस दरगाह के गद्दी नशीन हैं।बाबा शाह का जन्म आज से लगभग 550 वर्ष पूर्व बगदाद में हुआ था तथा बाबा शाह कमाल कादरी लगभग साढ़े चार सौ वर्ष पूर्व बगदाद से यहां तशरीफ लाए थे। बाबा शाह कमाल हजरत मोहम्मद की तरह मुसलमानों के दिव्य विभूति समझे जाने वाले हजरत गौस पाक महीउद्दीन की 11वीं पुश्त में से थे।
बाबा का नाम ‘कमाल शाह’ कैसे पड़ा?
लोगों का ऐसा कहना है कि जिस समय बाबा का जन्म हुआ उसके लगभग आधे घंटे बाद एक पहुंचे हुए मुस्लिम फकीर उनके पालने के समीप पहुंचे तथा उन्होंने उस नवजात शिशु को सलाम किया। शिशु ने प्रत्युत्तर में तुरंत ही फकीर को वालेकुम सलाम किया। उस नवजात शिशु को बोलता देखकर फकीर व अन्य लोग हतप्रभ हो उठे तथा बरबस ही सबके मुंह से निकल उठा यह तो ‘कमाल’ हो गया और बस तभी से बाबा का नाम कमाल शाह पड़ गया। कालांतर में कमाल शाह ईरान से चलकर दूर दराज के देशों में घूमते हुए मुलतान पहुंचे तथा वहां से लुधियाना में बाबा लगभग पांच वषो तक रहे तथा वहां उनकी मुलाकात बाबा लाल दयाल से हुई थी। बाबा लाल दयाल से अपने प्रगाढ़ संबंधों के कारण बाबा कमाल शाह ने अपने नाम के साथ बाबा शाह कमाल शाह लाल दयाल जोड़ लिया जो आज तक उनके नाम के साथ जुड़ा है। बाद में कमाल शाह कैथल में आकर बस गए। जिस समय बाबा कैथल में आकर रहने लगे.
कैथल में संत बाबा शीतलपुरी की बोलती थी तूती
उसी समय हिन्दुओ के परम संत बाबा शीतलपुरी की तूती कैथल और आसपास पूरी तरह से बोलती थी। बाबा जी उस समय अनेको सामाजिक बुराइयों से लड़ रहे थे तथा हिन्दुओं के धर्म परिवर्तन को रोकने में लगे थे। उस समय कैथल में नवाबों का राज्य था तथा वह हिन्दुओं को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए जोर जबरदस्ती कर रहे थे। बाबा हिन्दुओं के प्रबल समर्थक थे तथा वह कहते थे कि धर्म परिवर्तन की बजाय मरना श्रेयस्कर है। बाबा के इस अडि़यल रुख से भयभीत होकर नवाब कैथल दिल्ली पहुंचा। इस समय के विषय में लोगों को भ्रांति है। कुछ लोगों का मत है कि इस समय दिल्ली पर इब्राहम लोदी का राज था जो कुछ का विचार है कि इस समय औरंगजेब दिल्ली का बादशाह था और दिल्ली के बादशाह ने बाबा शीतलपुरी का शक्ति परीक्षण करना चाहा और माध्यम में बाबा कमाल शाह सुबह-सुबह शेर पर सवार होकर तथा सर्प का कोड़ा लेकर बाबा कमाल शाह कैथल के बाबा शीतलपुरी के डेरे पर पहुंचे।

उस समय बाबा शीतलपु री दीवार पर बैठे दातुन कर रहे थे। कमाल शाह की मनोदशा को समझकर बाबा ने दीवार को आदेश दिया कि वह दस कदम चलकर बाबा कमाल शाह का आदर करे। दीवार ने बाबा के आदेशों का पालन किया था तथा अपने स्थान से दस कदम आगे बढ़ गई। यह दीवार आज तक विदक्यार नामक तीर्थ में विराजमान है। आदर सम्मान के बाद बाबा कमाल शाह ने बाबा शीतल पूरी से पूछा कि वह अपना शेर कहां बांधे। इस पर बाबा ने रहस्यमय मुस्कराहट के साथ कहा कि वह अपना शेर गायों के बाड़े में छोड़ दें तथा सांप को खूंटी पर टांग दें। सुबह होने पर बाबा शाह ने वापिस लौटने के लिए शेर व सर्प की मांग की। बाबा ने कहा कि देखकर वापिस ले लो। बाबा कमाल शाह उस समय चकित हो उठे जब गायों के बाड़े में शेर व सर्प दोनों गायब मिले। कमाल शाह को चकित पाकर बाबा शीतल पूरी मुस्कर उठे तथा उन्होंने पास खड़ी गाय से कहा कि यह तो मेहमान है इसका शेर दे दो। यह सुनकर गाय ने जुगाली की और शेर व सर्प दोनों प्रकट हो उठे। इस घटना के बाद बाबा शीतलपुरी व बाबा कमाल शाह में प्रगाढ़ मित्रता हो गई तथा वे दोनों पगड़ी बदल भाई बन गए।
बाबा शाह कमाल व बाबा शीतलपुरी की दोस्ती की आज भी लोग मिसाल देते हैं
एक बार बाबा शीतलपुरी ने बाबा कमाल शाह की नाजुक हालत देखकर उन्हें पारस पत्थर का एक टुकड़ा रखने को दिया। कुछ दिनों बाद दोनों महान संत शाम को साथ घूमने निकले। राह में शीतलपुरी जी ने मन ही मन सोचा कि बाबा शाह कमाल ने पारस के पत्थर का इस्तेमाल क्यों नहीं किया।बाबा तुरंत शीतलपुरी के मनोभावों को समझकर उत्तेजित हो उठे और उन्होंने जमीन पर पड़े मिट्टी के एक ढेले को उठाकर जमीन पर दे मारा और देखते ही देखते मिट्टी के टुकड़े सोने के टुकड़े में परिवतिर्त हो गए। बाबा शाह कमाल व बाबा शीतलपुरी की दोस्ती की आज भी लोग. मिसाल देते हैं, इतना ही नहीं बल्कि विशेष पर्व पर बाबा शाह कमाल की दरगाह से बाबा शीतलपुरी के डेरे के लिए प्रतीक श्रद्धा पूर्वक ‘केसरी पगड़ी’भेजी जाती है तथा बाबा शीतलपुरी के डेरे से बाबा शाह कमाल की दरगाह पर उर्स के मौके पर ‘नीली चादर’ भेजी जाती है। जिस के पश्चात उर्स मेला शुरू होता है .र्बाबा शाह कमाल के परिवार में लोगो का कहना है कि बाबा शाह कमाल कादरी के हजरत नूर, अमाउलद्दीन तथा अजरत मकबूल नामक तीन पुत्र हुए। अजरत नूर भी बड़े चमत्कारी पुरुष थे। उनके बारे में भी एक किस्सा मशहू र है कि जब अजरत नूर तीन वर्ष के थे तो तब वह एक बार अपने साथी के साथगुल्ली डण्डा खेल रहे थे। जब अजरत नूर की बारी आई तो उनके साथी को उनकी मां ने बुला लिया तथा जैसे ही वह लड़का घर पहुंचा तो उसका इंतकाल हो गया। उधर नूर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे और उधर उनके साथी का जनाजा उसके घर से निकल रहा था। जनाजे को देखने पर अजरत को लगा कि यह तो उनके दोस्त की अर्थी है। इस पर उन्होंने कहा कि मेरी बारी दिए बगैर तू कैसे जा सकता है। लोग यह देखकर हैरान होगए कि नूर के इन शब्दों के साथ वह लड़का पुन: जीवित हो उठा और नूर के साथ आकर खेलने लगा।

कैथल नगर के प्रमुख जवाहर पार्क में स्थित बाबा शाह कमाल की दरगाह के अंदर बाबा शाह कमाल, उनकी पत्नी जँहारा कमाल उनके पुत्र अजरत नूर, अमाउलद्दीन तथा अजरत मकबूल की मजारें बनी हुई हैं, जिनमें लोग बड़ी श्रद्धा के साथ माथा टेकने आते हैं। ऐसी जानकारी मिली है कि 1947 तक इस दरगाह की देखरेख का कार्य मुस्लिम गद्दी नशीन करते थे परंतु विभाजन के बाद मुस्लिम पाकिस्तान चले गए। इसके पश्चात दरगाह की मरम्मत व पुर्नरुद्धार का कार्य कैथल निवासी लाला रोशनलाल गुप्ता ने किया तथा उनकी मृत्यु के उपरांत अब बाबा कुलवंत शाह गद्दी नशीन इस पवित्र की दरगाह कोथा सक्योकि मुचित ढग से चलाया और अब उनके पुत्र बाबा रजनीश शाह बड़ी श्रद्धा और निष्ठा पीर बाबा की सेवा कर रहे है और उन्होंने देश और विदेश के लाखो श्रद्धालुओं की बाबा शाह कमाल की दरगाह से जोड़ा हुआ है ।
बाबा शाहकमाल की 13 वीं पुश्त के वर्द्ध संत सैयद मक़बूल गिलानी पाकिस्तान के डेरा गाजी खां में एक बड़ी दरगाह की देखभाल करते है और पाकिस्तान के बड़े बड़े राजनेता और श्रद्धालु उन्हें अपना पीर मानते है। इसी प्रकार सैयद मक़बूल गिलानी के भाई स्वर्गीय सैयद गुलाम के पुत्र सलमान खान पाकिस्तान की जानी मानी दरगाह डेरा पाकपत्तन , डेरा कबूला शरीफ के गद्दी नशीन है. सलमान मोहसिन पाकिस्तान के एक बड़े राजनेता और अभिनेता है जो कि डेरा पाकपत्तन संसदीय सीट से पाकिस्तान के सब से कम उम्र के एम एन ए निर्वाचित हुए थे। डेरा पाकपत्तन की दरगाह का नाम बाबा फरीद के नाम से भी बहुत मशहूर है। कैथल में बाबा शाह कमाल की दरगाह पर आयोजित होने वाले सालाना उर्स के मोके पर बाबा शाह कमाल के वंशज सैयद मक़बूल गिलानी, सलमान मोहसिन अपने अनेको साथियो, पाकिस्तान के सुप्रशिद कव्वालों , गायको , लेखकों ओर श्रद्धालुओं के साथ कैथल आते रहे है और कैथल के लोगो द्वारा उनका भव्य स्वागत किया जाता था क्योकि बाबा शाह कमाल के परिवार के यह लोग कैथल से ही भारत पाकिस्तान बटवारे के समय गए थे। सैयद मक़बूल गिलानी जब कैथल आते तो अपने बचपन के दोस्तों के यहाँ दावतो में शामिल होते थे। हरियाणा के पूर्व संसदीय सचिव स्वर्गीय रोशन लाल तिवाड़ी, जानेमाने लेखक और शायर चौधरी रणधीर सिंह उनके बचपन के दोस्त रहे थे और प्रताप गेट के निकट जैन स्कूल के मालिक विक्रम सैन जैन, प्रेम जैन से उनके पारिवारिक रिश्ते रहे। दोनों देशो लोगो के बीच बाबा शाह कमाल शाह दरगाह के प्रति आस्था को लेकर आपसी गहरे सम्बन्ध अभी भी कायम है। बाबा शाह कमाल शाह के वंशजो का लम्बे समय समय तक कैथल के कई परिवारों में विवाह शादी और दुख सुख में आना जाना लगा रहता था , यहाँ तक की बाबा शाह कमाल शाह के वंशजो के परिवार में विवाह शादी और अन्य समारोहों दौरान कैथल के कई लोगो का पाकिस्तान होने वाले पारिवारिक कार्येकर्मों में शामिल होने जाते थे। बाबा शाह कमाल शाह के वंशज सैयद मक़बूल गिलानी के बेटे की शादी और सलमान मोहसिन के पारवारिक समारोह में शामिल होने के लिए कई वर्ष पूर्व हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार नवीन मल्होत्रा , सुप्रशिद समाजसेवी एवं दानवीर कैलाश भक्त , उनकी पत्नी रानी भक्त और कैथल के समाजसेवी जय चंद मालिक लाहौर और कराची गए थे। उन्होंने बताया कि बाबा शाह कमाल के वंशजो ने उनका बहुत आदर सत्कार किया था। अभी भी बाबा शाह कमाल शाह के वंशज सैयद मक़बूल गिलानी और सलमान मोहसिन के कैथल के कई परिवारों के साथ पारिवारिक सम्बन्ध है और वह फोन पर कहते है कि कैथल आने को बहुत मन करता है लेकिन भारत आने के लिए वीजा न मिलने पर वह नहीं आ सकते लेकिन वह कहते है कि हम हर समय कैथल लोगो की सुख समृद्धि की दुआ करते रहते है। वह हर वर्ष बाबा शाह कमाल के उर्स मेले पर अपनी शुभकामनाये भेजते है। हर वर्ष मार्च के अंत मे बाबा शाह कमाल शाह की दरगाह पर प्रति वर्ष बाबा की पुण्य तिथि के अवसर पर एक भव्य उर्स मेले का आयोजन किया जाता है तथा इस अवसर पर बड़ा भारी मेला लगता है। इस उर्स के अवसर पर देश व विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं तथा उन द्वारा बाबा की दरगाह पर चादरें चढ़ाई जाती हैं। तीन दिवसीय इस उर्स के मौके पर देश के जाने-माने कव्वाल अपनी मधुर आवाजों से कव्वालियां गाकर बाबा का गुणगान कर ते हैं। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 28 मार्च से 30 मार्च तक बाबा शाह कमाल का उर्स समारोह बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। बाबा के उर्स की तैयारियां बड़े जोरों से की जा रही है , जवाहर पार्क में स्थित बाबा शाह कमाल और बाबा शाह सिकंदर की दरगाहों सहित शहर के मुख्य चौक, पार्क के मुख्य द्वार और सड़कों को बड़े सुंदर ढंग से सजाया गया है। बाबा शाह कमाल दरगाह के अथक भकत राधे श्याम , नरेश दलाल एडवोकेट , नवीन गुगलानी , अशोक ठकराल , डॉ गोपाल , मनोज गोयल , आशु कथूरिया , अंकित टंडन , संदीप , रिंकू , ललित , शुभम ,फुला राम सैनी , चिराग मुंजाल , राजू सेठ ,योगी कथूरिया , साहिल चुटानी , मोनू धीमान , हैप्पी , सोनू , मनीष धीमान सहित अन्य अनेको श्रद्धालु बाबा शाह कमाल के उर्स को धूमधाम मनाने के लिए दिनरात जुटे हुए है। उन्होंने बताया कि बाबा शाह कमाल के तीन दिवसीय उर्स के दौरान देश के जानेमाने कलाकारों द्वारा कव्वालियां प्रस्तुत की जाती है और इस बार 29 मार्च शनिवार को देश के जानेमाने गायक हमसर हैयात बाबा शाह कमाल की दरगाह पर बाबा शान में कव्वालियां पेश करेंगे , उन्होंने कहा कि बाबा शाह कमाल की दरगाह पर आयोजित इस सालाना उर्स मेले के तीनो दिन श्रद्धालुओं द्वारा लगातार लंगर का आयोजन किया जाता है । कैथल स्तिथ बाबा शाह कमाल की दरगाह के गद्दीनशीन बाबा रजनीश शाह ने श्रद्धालुओं से बाबा के सालाना उर्स मेला पर पहुंचकर बाबा शाह कमाल आशीर्वाद लेने का आह्वाहन किया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से यह भी अनुरोध किया है कि वह बाबा शाह कमाल के उर्स मेला के दौरान तीनो दिन लगातार चलने वाले भंडारा प्रशाद भी जरूर ग्रहण करे .
Tags: This Dargah of Kaithal is a living example of Hindu-Muslim unity... a huge fair is held here
Categories: कैथल, देश / विदेश, ब्रेकिंग न्यूज, लेटेस्ट न्यूज़, हरियाणा
Leave a Reply