अंबाला 10 फरवरी : आज शंभू बॉर्डर मोर्चे पर आंदोलन कर रहे संगठनों ने प्रेस कांफ्रेंस की, जिसमें वरिष्ठ नेता सरवन सिंह पंधेर ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र में चल रहे संकटों को हल करने के संघर्ष को व्यापक स्तर पर ले जाने और सहयोगी संगठनों के साथ एकता को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।0
शंभू बॉर्डर पर प्रैसवार्ता करते किसान नेता
संयुक्त किसान मोर्चा भारत द्वारा 12 फरवरी को बुलाई गई बैठक में दिल्ली आंदोलन 2 के नेता चंडीगढ़ के किसान भवन में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि वे संपूर्ण एकता के समर्थक हैं, लेकिन किस प्रकार की एकता होगी, यह बैठक में तय किया जाएगा। उन्होंने सभी संगठनों से जनहित को ध्यान में रखते हुए एकता पर विचार करने की अपील की।
उन्होंने बताया कि 14 फरवरी को चंडीगढ़ में केंद्र और पंजाब सरकार के मंत्रियों के साथ बैठक होगी। हालांकि, सरकार का रुख हाल ही में पेश किए गए बजट से स्पष्ट हो गया है, लेकिन वे कभी भी बातचीत से पीछे नहीं हटे हैं।
13 फरवरी को, जब मोर्चा एक वर्ष पूरा करेगा, देशभर के संगठन के नेता शंभू में जुटेंगे और पंजाब, हरियाणा व उत्तर भारत के किसान व मजदूर बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। यदि 14 फरवरी की बैठक में कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तो 25 फरवरी को शंभू बॉर्डर से दिल्ली के लिए पैदल मार्च शुरू किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि खन्ना के युवा एथलीट कोच दिलप्रीत सिंह 302 किलोमीटर की दौड़ लगाकर संसद तक पहुंचने की योजना बना रहे हैं। आंदोलनकारी संगठनों ने उनकी सराहना की।
इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका से भारतीय नागरिकों के निर्वासन पर सरकार की चुप्पी की आलोचना की और प्रभावित युवाओं के लिए आर्थिक सहायता व पुनर्वास योजना की मांग की।
उन्होंने 5 फरवरी 2022 को पंजाब में प्रधानमंत्री मोदी की चुनावी रैली के दौरान हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर किसान नेताओं के खिलाफ धारा 307 के तहत दर्ज किए गए झूठे मामलों की निंदा की और उनकी वापसी की मांग की।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आंदोलन को दबाने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।
इस अवसर पर कई किसान-मजदूर नेता, जैसे जसविंदर सिंह लोंगोवाल, जंग सिंह भतेरी, गुरअमनीत सिंह मांगट, हरजीत सिंह मंगट, बलकार सिंह बैंस, हरप्रीत सिंह बहिरांके, जरमनजीत सिंह बंडाला, बाज सिंह सरंगड़ा, सुखदेव सिंह चाटीविंड, बलदेव सिंह बग्गा, और कंधार सिंह भोएवाल उपस्थित रहे।
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