कैथल (रमन सैनी) अमेरिका से निर्वासित किए गए 104 भारतीय अब घर लौट चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका से डिपोर्ट किए गए भारतीयों को मेक्सिको-अमेरिकी सीमा से पकड़ा गया था, कहा जा रहा है कि ये लोग भारत से वैध तरीके से रवाना हुए थे, लेकिन इन्होंने डंकी रूट के जरिए अमेरिका में घुसने की कोशिश की थी। निर्वासित लोगों में हरियाणा और गुजरात से 33-33, पंजाब से 30, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से तीन-तीन और चंडीगढ़ से दो लोग हैं।
अमेरिका से हरियाणा के 33 युवाओं को डिपोर्ट किए जाने के मामले के बाद कैथल युवा भाजपा नेता गुरप्रीत सैनी एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। ट्रंप की जीत पर बधाई देते हुए उन्होंने कैथल में पोस्टर लगवाए थे। लेकिन अब कैथल के 11 युवा अमेरिका से डिपोर्ट होकर लौटे हैं, तो उन्होंने ट्रंप के पोस्टर जलाकर उनके खिलाफ नारेबाजी की।
गुरप्रीत सैनी ने तब कहा था कि ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती से भारत-अमेरिका के रिश्ते मजबूत होंगे और भारतीयों को फायदा होगा। लेकिन अब जब बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं को अमेरिका से वापस भेज दिया गया है, तो यह मामला सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। गुरप्रीत सैनी ने कहा कि, अमेरिका में ट्रंप की जीत पर मैंने पोस्टर लगाए थे, लेकिन अब जब हरियाणा के 33 और कैथल के 11 युवा डिपोर्ट कर दिए गए, तो मुझे बेहद अफसोस हुआ। युवाओं ने 40-50 लाख रुपए खर्च कर अमेरिका जाने का सपना देखा था, लेकिन उन्हें आतंकवादियों की तरह हाथ-पैरों में हथकड़ियां लगाकर वापस भेजा गया। यहां तक कि जब उन्हें भारत लाया गया, तब भी उनके हाथों में हथकड़ियां थीं। यह बहुत गलत है।
गुरप्रीत सैनी ने डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर जलाए और उनके खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए। सैनी ने कहा कि उन्होंने ट्रंप की जीत पर इसलिए जश्न मनाया था, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि भारतीय प्रवासियों को मदद मिलेगी, लेकिन अब वह खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। कैथल में गुरप्रीत सैनी द्वारा ट्रंप के समर्थन में लगाए गए पोस्टर पहले भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे। अब जब उन्होंने ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, तो लोग उनके पुराने बयानों को लेकर चर्चा कर रहे हैं।
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